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हिमसंस्कृतवार्ताः > Blog > पहाड़ी गल्लां > घेरसू दियाली-: दियाली ता हूण बी मनांदे अहें
पहाड़ी गल्लां

घेरसू दियाली-: दियाली ता हूण बी मनांदे अहें

डॉ.अमनदीप शर्मा
Last updated: 2024/10/29 at 8:46 AM
डॉ.अमनदीप शर्मा - Founder Of Himsanskritam.com
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1 Min Read
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घेरसू दियाली
दियाली ता हूण बी मनांदे अहें,
पर से पहले ओली दियाली सबी ते नोखी हुआं थी,
छलियाँ बढी कने बची जां थे टांडू,
घेरसू बनाने जो तिन्हा टांडूआं री सफाई हुआं थी,
इक हफ्ता पइले लगी जां थे तयारियां करने जो,
घा कने टांडूआं रे लम्बे लम्बे घेरसू बनां थे
संजके जुना नेअरे नेअरे खेतां च घेरसू बाला थे,
घ्याना लाईने फेरी उत्थी दियालियां रे गीत गां थे,
घेरसुआं बाली कने कने ढलाके बी चलाँ थे,
जोरा जोरा ने घ्याने ले बैठी ने ठ्ठाहके बी लां थे,
कई बार घरा आलेयां ते गालियां बी पौआं थी,
पर अप्पू मंज बाओत प्यारा रियां गल्लां बी हुआं थी,
दियाली ता हूण बी मनांदे अहें,
पर से पहले ओली दियाली सबी ते नोखी हुआं थी।

अनछपी कने अपनी कबता

डॉक्टर जय महलवाल (अनजान)
ई ०१, प्रोफेसर कॉलोनी
राजकीय महाविद्यालय बिलासपुर हिमाचल प्रदेश पिन 174001
संपर्क 9418353461

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TAGGED: dipawali, diwali
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