पहाड़ी गल्लां

नमस्कार।। हिमसंस्कृतवार्ताः हिमाचलप्रदेश में संस्कृत एवं संस्कृति के प्रचार के लिए शुरु किया गया प्रकल्प है जिसका उद्देश्य संस्कृत एवं हिमाचल की संस्कृति भाषा काव्य एवं लेखकों पर प्रकाश डालना है। उसी कड़ी में हमारा पहाड़ी गल्लां का यह पृष्ठ हिमाचली लोकगीतों, कविताओं , कहानियों को समर्पित रहेगा। इसमें हिमाचल के पहाड़ी भाषा के लेखकों के लेखों को आपके साथ साझा किया जाएगा।

अजकला रे छोरुआं रा बखरा ई कम्म- रविन्द्रकुमार

अजकला रे छोरुआं रा बखरा ई कम्म कहरें कम्म करदे नी बाबू बणी घुमदे दारू जिथी मिली जाओ पेग लाई

तुलसी बणा कने बसूटी

तुलसी बणा कने बसूटी गांवां च थी इक पहटी सारे सलूणे थे बणिरे बड़े स्वाद धोतवीं दाल़ी च था क्यू

पहाड़ी गल्लां- नी भुलणा भराड़ीघाट

नी भुलणा भराड़ीघाट ब्लॉसपुरा ते शिमले जो जांदेयाँ औन्दा था बीच रास्ते च भराड़ीघाट सब औणे जाणे वाल़े खांदे थे

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