By using this site, you agree to the Privacy Policy and Terms of Use.
Accept
हिमसंस्कृतवार्ताःहिमसंस्कृतवार्ताःहिमसंस्कृतवार्ताः
  • मुखपृष्ठम्
  • E- हिमसंस्कृतवार्तापत्रम्
  • राष्ट्रीयवार्ताः
    • प्रादेशिकवार्ता
    • वित्तीयवार्ता
    • चलचित्रवार्ताः
    • क्रीडावार्ताः
  • हिमाचलवार्ता
  • पहाड़ी गल्लां
  • हिमसंस्कृतज्ञानपरीक्षा
  • विविध
    • लेखकाः पत्रकाराश्च
    • संस्कृतगतिविधयः
    • अन्ताराष्ट्रीयवार्ताः
    • धर्मसंस्कृतिः
    • पञ्चागम्
    • बोधकथा
    • विचारविमर्शः
    • संस्कृतबोधकथा
  • About us
    • Privacy Policy
Search
© 2025 Himsanskritam organization. All Rights Reserved.
Reading: पहाड़ी गल्लां-ः पुराणा डाल़ बडणा नवां कोई नी लाणा
Share
Sign In
Notification Show More
Font ResizerAa
हिमसंस्कृतवार्ताःहिमसंस्कृतवार्ताः
Font ResizerAa
  • मुखपृष्ठम्
  • E- हिमसंस्कृतवार्तापत्रम्
  • राष्ट्रीयवार्ताः
  • हिमाचलवार्ता
  • पहाड़ी गल्लां
  • हिमसंस्कृतज्ञानपरीक्षा
  • विविध
  • About us
Search
  • मुखपृष्ठम्
  • E- हिमसंस्कृतवार्तापत्रम्
  • राष्ट्रीयवार्ताः
    • प्रादेशिकवार्ता
    • वित्तीयवार्ता
    • चलचित्रवार्ताः
    • क्रीडावार्ताः
  • हिमाचलवार्ता
  • पहाड़ी गल्लां
  • हिमसंस्कृतज्ञानपरीक्षा
  • विविध
    • लेखकाः पत्रकाराश्च
    • संस्कृतगतिविधयः
    • अन्ताराष्ट्रीयवार्ताः
    • धर्मसंस्कृतिः
    • पञ्चागम्
    • बोधकथा
    • विचारविमर्शः
    • संस्कृतबोधकथा
  • About us
    • Privacy Policy
Have an existing account? Sign In
Follow US
© 2025 Himsanskritam.com All Rights Reserved .
हिमसंस्कृतवार्ताः > Blog > पहाड़ी गल्लां > पहाड़ी गल्लां-ः पुराणा डाल़ बडणा नवां कोई नी लाणा
पहाड़ी गल्लां

पहाड़ी गल्लां-ः पुराणा डाल़ बडणा नवां कोई नी लाणा

डॉ.अमनदीप शर्मा
Last updated: 2026/01/10 at 9:13 PM
डॉ.अमनदीप शर्मा - Founder Of Himsanskritam.com
Share
1 Min Read
SHARE

पहाड़ी गल्लां-ः पुराणा डाल़ बडणा नवां कोई नी लाणा

डेढ़ सौ साल पुराणा डाल़ बडया करदे
तिसरिया जगह नवां कोई नी लगायादे
छोटियाँ सडकां ने हुई जाणा था गुज़ारा
ढिगां रुढाई कने फोरलेन कजो बणायादे

हुण चलया फोरलेन शिमले जो उजड़े ढाबे खोखे वाले
नौणी विनायकघाट ब्रह्मपुखर दोबारा बणगे हुण सारे
खून पसीने ने बणाइरे उजड़ी गए सै मकान
तीन सौ साल पुराणे पीपल़ बी बडी कने सट्टे कनारे

इस साल करोड़ां फोरलेना पर लाणा
अगले साल कुदरता सै पीह रुढाणा
जे एहड़ा नी हो बार बार ढए नी कुछ बी
तां महकमे वाल़ेयां रा कम्म कियां चलना क्या खाणा

छोटे जे डाल़ा लाणे जो सारे
वन महोत्सव हर साल मनान्दे
लगदा नी कोई बी डाल देखदा नी कोई
पाणी देंदेयां रा हर साल फोटो खिचांदे

नवें डाल़ा रा पेड़ बणन्देयां लगी जाणी सदियां
सडकां रे नावां पर डाल़ बड्डी कने जेबां अपणी भरियाँ
करोड़ां फुकी दिते नवें डाल़ लगाणे रे नावां पर
पर घटया करदे जंगल जमीनां साफ हुई गी सारियां

रवींद्र कुमार शर्मा
घुमारवीं
जिला बिलासपुर हि प्र

You Might Also Like

पहाड़ी गल्लां-ः बधी गई हर चीजा री भुख

पहाड़ी गल्लां-ः लागड़ तोकड़ कने फंडर

पहाड़ीगल्लां-ः चेला लगया रड़ाणे

पहाड़ी गल्लां-ः ऊखल़ कुंडी कने सिल बत्तू

चिट्टे कन्ने चिट्टा रंग बदनाम होइ गया-डॉ.रजनीश अवस्थी

TAGGED: पहाड़ी कविता, पुराणा डाल़ बडणा
Share This Article
Facebook Twitter Copy Link Print
Share
What do you think?
Love0
Sad0
Happy0
Sleepy0
Angry0
Dead0
Wink0
By डॉ.अमनदीप शर्मा Founder Of Himsanskritam.com
Follow:
Himsanskritvarta: It is a non-profit project to promote Sanskrit journalism, whose aim is to make available material for reading Sanskrit news in educational institutions. Many Sanskrit teachers and Sanskrit lovers are contributing in this work. If you also want to cooperate in this work, then write Namaste on our WhatsApp number 7876636263.
Previous Article पहाड़ीगल्लां-ः चेला लगया रड़ाणे
Next Article पहाड़ी गल्लां-ः लागड़ तोकड़ कने फंडर
Leave a comment Leave a comment

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

about us

समाजे सैव भाषा जीवति यस्याः व्यवहारिकता समाजे संदृश्यते, यावत् पर्यन्तं भाषायाः मौखिकपक्षः लिखितपक्षः वाचिकपक्षश्च समाजे वर्तमानकालिकसन्दर्भेषु न प्रयुज्यते तावत् पर्यन्तं भाषायाः विकासः नैव भविष्यति, अतः भाषायाः विकासार्थमेव संस्कृतपत्रकारितायाः क्षेत्रमवलम्ब्य हिमसंस्कृतवार्तायाः सर्वे राजनैतिकाः आर्थिकाः सामाजिकाः च प्रयत्नाः प्रतिदिनं संस्कृतभाषायाः व्यवहारिकं पक्षं सुदृढं कर्तुम् कृतसङ्कल्पाः सन्ति, येषां लाभः भविष्ये संस्कृतक्षेत्राय भविष्यति।

हिमसंस्कृतवार्ताःहिमसंस्कृतवार्ताः
Follow US
© 2023 Himsanskritam.com. All Rights Reserved.
Go to mobile version
Welcome Back!

Sign in to your account

Lost your password?