पहाड़ी गल्लां

नमस्कार।। हिमसंस्कृतवार्ताः हिमाचलप्रदेश में संस्कृत एवं संस्कृति के प्रचार के लिए शुरु किया गया प्रकल्प है जिसका उद्देश्य संस्कृत एवं हिमाचल की संस्कृति भाषा काव्य एवं लेखकों पर प्रकाश डालना है। उसी कड़ी में हमारा पहाड़ी गल्लां का यह पृष्ठ हिमाचली लोकगीतों, कविताओं , कहानियों को समर्पित रहेगा। इसमें हिमाचल के पहाड़ी भाषा के लेखकों के लेखों को आपके साथ साझा किया जाएगा।

पहाड़ीगल्लां-ख्यालां दे महलां

पहाड़ीगल्लां- ख्यालां दे महलां ख्यालां दे महलां चिणदे चणदियां । उमरां चली गई घरां जो बसदियां ।। बड़ी दूर बस्से

पहाड़ी गल्लां – दोस्ती जोड़ी राख

पहाड़ी गल्लां "दोस्ती जोड़ी राख" ज्यादा क्यूं सोचो ए , इच्छा ही थोड़ी राख । दुःखा चे ना रोया कर,

चिट्टे कन्ने चिट्टा रंग बदनाम होइ गया-डॉ.रजनीश अवस्थी

चिट्टे कन्ने चिट्टा रंग बदनाम होइ गया चस्का चिट्टे दा सब जगह आम होइ गया बर्बाद जवानी पिचकू गालां जो

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