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हिमसंस्कृतम् (न्यास) प.सं.86/2026

संस्था: हिमसंस्कृतम् 
(यह न्यास विलेख भारतीय न्यास अधिनियम, 1882 एवं पंजीकरण अधिनियम के अंतर्गत निष्पादित वैधानिक दस्तावेज़ का संशोधित एवं अद्यतन प्रारूप है)
यह न्यास विलेख आज दिनांक 12 अगस्त 2026 को श्रीमती शिवानी शर्मा द्वारा निष्पादित किया जा रहा है, जिन्हें आगे इस विलेख में "संस्थापक/संस्थापिका न्यासी" (Founder Trustee / Settlor) के रूप में संबोधित किया जाएगा।
1. संस्था का नाम (NAME OF THE TRUST)संस्था का नाम "हिमसंस्कृतम्" (Himsanskritam) होगा।
2. नाम एवं बौद्धिक संपदा का संरक्षण (Protection of Name and Intellectual Property)न्यास के नाम "हिमसंस्कृतम्" अथवा इसके प्रकल्पों जैसे- 'Himsanskritam.com', 'हिमसंस्कृतवार्ता' (HimSanskritVarta), 'पहाड़ी गल्लां' (Pahari Gallan)  आदि का किसी भी अनधिकृत व्यक्ति या संस्था द्वारा उपयोग, संस्थापक न्यासी की पूर्व लिखित सहमति के बिना पूर्णतः वर्जित एवं प्रतिबंधित है।
3. संस्था का पंजीकृत कार्यालय (REGISTERED OFFICE)संस्था का मुख्य पंजीकृत कार्यालय निम्नलिखित पते पर स्थित होगा:संस्था का कार्यालय: भटेड़, नजदीक जसवां कोटला तहसील, डाकघर कस्बा कोटला, जिला कांगड़ा, हिमाचल प्रदेश - 177111।विशेष प्रावधान: भविष्य में कार्यक्षेत्र के विस्तार, प्रशासनिक सुगमता एवं न्यास के उद्देश्यों की पूर्ति की दृष्टि से कार्यालय परिवर्तित करने का पूर्ण अधिकार संस्थापक न्यासी के पास सुरक्षित रहेगा।
4. न्यास के उद्देश्य (OBJECTS OF THE TRUST)यह न्यास पूर्णतः गैर-लाभकारी, धर्मार्थ (Charitable), शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक उद्देश्यों हेतु निम्नलिखित मुख्य लक्ष्यों के साथ कार्य करेगा:
संस्कृत भाषा का प्रचार-प्रसार: हिमाचल प्रदेश तथा पूरे भारत में संस्कृत भाषा, साहित्य, दर्शन तथा संस्कृति के संवर्धन, विकास एवं व्यापक प्रचार-प्रसार हेतु कार्य करना।
हिमाचल की लोकसंस्कृति का प्रचार-प्रसार: हिमाचल की समृद्ध लोकसंस्कृति के सभी तत्वों जैसे धार्मिक स्थान, साहित्यकार, कवि, लेखक, पहनावा, खानपान इत्यादि सभी का प्रचार-प्रसार व संरक्षण करना।
डिजिटल माध्यमों का उपयोग: आधुनिक डिजिटल तकनीकों, समाचार पत्रों, पत्रिकाओं, पोर्टल्स एवं सोशल मीडिया के माध्यम से संस्कृत भाषा में गुणवत्तापूर्ण सामग्री का निर्माण एवं प्रसार करना।
शैक्षणिक एवं अनुसंधानात्मक गतिविधियाँ: संस्कृत भाषा, आयुर्वेद, ज्योतिष, वास्तु शास्त्र एवं प्राचीन भारतीय ज्ञान-परंपरा पर कार्यशालाएँ, विचार-गोष्ठियाँ (Seminars), सम्मेलन तथा शोध गतिविधियों का आयोजन करना।
शिक्षण सामग्री एवं प्रकाशन: विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं सामान्य जनमानस के लिए संस्कृत शिक्षण सामग्री, पत्र-पत्रिकाएँ, दैनिक समाचार पत्र (जैसे- 'हिमसंस्कृतवार्ताः'), पुस्तकें तथा डिजिटल अध्ययन संसाधन (E-learning resources) तैयार व प्रकाशित करना। संस्कृत पत्रकारिता (मीडिया) के क्षेत्र में कार्य करना तथा डिजिटल पत्रकारिता को बढ़ावा देना। संस्कृत-संस्कृति के प्रचार-प्रसार के लिए Electronic एवं Print Media के क्षेत्र में कार्य करना। संस्कृत-संस्कृति के शोध को बढ़ावा देना तथा शोध पत्रिकाओं व पत्रों का प्रकाशन करना।
मेधावी एवं समर्पित जनों का सम्मान: संस्कृत क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले विद्वानों, शिक्षकों, शोधकर्ताओं तथा विद्यार्थियों को प्रोत्साहित व सम्मानित करना।
संस्कृत शिक्षा में नवाचार: विद्यालयों, महाविद्यालयों तथा विश्वविद्यालयों के स्तर पर संस्कृत शिक्षण को सरल, व्यावहारिक एवं रुचिपूर्ण बनाने के लिए अभिनव शिक्षण पद्धतियों का विकास करना।
सांस्कृतिक धरोहर का संरक्षण: देवभूमि हिमाचल की समृद्ध संस्कृत एवं साहित्यिक परंपरा तथा पांडुलिपियों (Manuscripts) के संरक्षण एवं पुनरुद्धार हेतु प्रयास करना। हिमाचल की बोलियों, कवियों, लेखकों एवं साहित्यकारों के संरक्षण एवं प्रचार के लिए साहित्यिक गोष्ठियों, कवि गोष्ठियों एवं साक्षात्कारों का आयोजन करना।
विद्यालयों की स्थापना: भारतीय संस्कृति के अनुकूल बाल शिक्षा के लिए प्राथमिक, माध्यमिक तथा उच्च विद्यालयों की स्थापना एवं संचालन करना।शिविरों का आयोजन: पौरोहित्य एवं ज्यौतिर्विज्ञान से संबंधित ज्ञान के प्रसार के लिए प्रशिक्षण शिविरों द्वारा जनमानस को शिक्षित करना। संस्कृत-संस्कृति के विकास के लिए संस्कृत कार्यशालाएँ, गोष्ठियाँ, संस्कृत सम्मेलन तथा संस्कृत प्रतियोगिताएं आयोजित करना।
प्रकाशन क्षेत्र में कार्य करना: संस्कृत की पांडुलिपियों का प्रकाशन करना तथा प्रकाशन के लिए सहयोग करना।
संस्कृत अभ्यर्थियों को प्रशिक्षण प्रदान करना: हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड द्वारा संचालित कक्षाओं की शिक्षा की व्यवस्था करना तथा हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय व भारत सरकार द्वारा मान्य विश्वविद्यालयों से दी जाने वाली पारंपरिक संस्कृत की परीक्षाओं के लिए छात्रों को तैयार करना; इसके साथ संस्कृत विषय के माध्यम से विभिन्न प्रशासनिक सेवाओं के लिए अभ्यर्थियों को प्रशिक्षण प्रदान करना।
पुस्तकालय व अवसंरचना की स्थापना: संस्था का कार्यालय, शिक्षण संस्थान तथा पुस्तकालय व शोध संस्थान बनाने के लिए भवन, भूमि तथा धन की व्यवस्था करना।
संस्थाओं का सहयोग: देश-विदेश में समान विचार व उद्देश्यों वाली संस्थाओं का सहयोग करना, तथा उनसे सहयोग प्राप्त करना जिससे संस्कृत के प्रचार-प्रसार में गति आए।
भाषाओं के विकास के लिए कार्य: संस्कृत के साथ-साथ हिन्दी भाषा तथा हिमाचल की स्थानीय बोलियों का प्रचार-प्रसार करना।
प्रदेश की द्वितीय भाषा के क्रियान्वयन हेतु प्रयास: संस्कृत हिमाचल प्रदेश की द्वितीय राजभाषा है अतः उसी सन्दर्भ में (PWD) राज्य लोक निर्माण विभाग के सहयोग से राजमार्गों के बोर्ड आदि पर संस्कृत में शहर गांव आदि के नामों को लिखने के लिए राज्य सरकार से अनुमति प्राप्त करना।लोकसंस्कृति का संरक्षण: हिमाचल की सरकारी गैर सरकारी संस्थाओं, मन्दिरों की प्रबन्धक समिति के सहयोग से लोकसंस्कृति का संरक्षण संवर्धन करना।
गौसेवा के क्षेत्र में कार्य करना: गोवंश संरक्षण, पालन तथा सर्वसौविध्ययुक्त गोशाला का निर्माण करना।
शैक्षणिक क्षेत्र में कार्य करना: शिक्षा विभाग से मान्यता प्राप्त करना तथा संस्कृत माध्यम से परम्परागत सनातन वैदिक गुरूकुल चलाना व हिन्दी, अंग्रेजी के माध्यमों से कम्प्यूटरकृत आधुनिक शिक्षा देने हेतु व्यवस्था करना, पूर्व प्राथमिक, प्राथमिक, माध्यमिक, हाईस्कूल, उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों एवं महाविद्यालयों का संचालन करना। औपचारिक शिक्षा केंद्र चलाना।
पर्यावरण के क्षेत्र में कार्य करना: पर्यावरण की शुद्धता एवं प्रदूषण रोकने के लिए कार्य करना, बढते हुए जल प्रदूषण एवं वायु प्रदूषण, ध्वनि प्रदूषण, तथा भूमि प्रदूषण की रोकथाम हेतु संचार प्रसार करना व कार्यशाला का आयोजन करना एवं इसकी रोकथाम हेतु विशेष प्रशिक्षण देना। वृक्षारोपण करना।

हिमसंस्कृतवार्ताः का परिचय

वर्तमान युग तकनीक का है, जब भारत में हर जगह ‘डिजिटल इंडिया’ आंदोलन चल रहा है। लगभग सभी के हाथों में मोबाइल फ़ोन हैं, ऐसे में संस्कृत विद्वानों के लिए पत्रकारिता के विकास का एक बेहतरीन अवसर है। आधुनिक समय में, यूट्यूब, फेसबुक, इंस्टाग्राम और ट्विटर जैसे कई सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म हैं जहाँ लोग दिन में कम से कम 3-4 घंटे बिताते हैं। सूचना का प्रसार अब सूखे ईंधन में आग की तरह है। इसी बीच, इंटरनेट के माध्यम से ई-समाचार पत्रों का आगमन आधुनिक युग की एक नई परियोजना है, जहाँ दुनिया के सभी प्रतिष्ठित समाचार पत्र प्रकाशित होते हैं। इसी क्रम में, ‘हिम संस्कृत समाचार’ आधुनिक संस्कृत के क्षेत्र में एक नई परियोजना है, जहाँ दैनिक समाचारों का आदान-प्रदान और प्रदान करके व्यावहारिक संस्कृत भाषा का प्रचार-प्रसार किया जा रहा है। हिम संस्कृत समाचार वर्तमान में संस्कृत के प्रयोगात्मक पहलू को दुनिया के सामने प्रसारित करता है। यह एक संस्कृत सेवा का कार्य है जिसको किसी आर्थिक लाभ की दृष्टि से नहीं अपितु संस्कृत के प्रसार की दृष्टि से चलाया जा रहा है। इसके दैनिक समाचार पत्र के लिए सदस्यों से वार्षिक शुल्क 100 रूपये लिया जाता है, जो कि हमारे बेबसाइट या अन्य संस्कृत कार्यक्रमों के आयोजन के लिए ही खर्च किया जाता है। यह संस्कृत शिक्षकों के द्वारा चलाया गया एक निस्वार्थ प्रयास है जिससे विद्यालयों , विश्वविद्यालयों के छात्र तथा देश के सामान्य नागरिक जो संस्कृत सीखना चाहते हैं वे लाभान्वित हो रहे हैं। 

18 जून, 2021 को यूट्यूब चैनल ने एक समाचार प्रसारण शुरू किया

हिम संस्कृत वार्ता 18 जून, 2021 को यूट्यूब के माध्यम से शुरू की गई। तब से यह सेवा प्रतिदिन सुबह संस्कृत समाचारों के साथ निर्बाध रूप से चल रही है। इसके संस्थापक हिमाचल प्रदेश के शिक्षा विभाग में कार्यरत डॉ. अमनदीप शर्मा हैं, जिनका उद्देश्य इस प्रकल्प से आर्थिक लाभ प्राप्त करना नहीं अपितु संस्कृत का प्रचार प्रसार है। वास्तव में, भारत में संस्कृत मीडिया क्षेत्र में कम संभावनाएँ होने के बावजूद, हिमाचल प्रदेश में, विशेषकर संस्कृत मीडिया क्षेत्र में, कोई खास प्रयास नहीं किया गया। हिमाचल प्रदेश राज्य संस्कृत शिक्षक परिषद के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. मनोज शैल भी हिमसंस्कृतवार्ता को सफल बनाने में विशेष सहयोग दे रहे हैं, उनका सहयोग दैनिक रूप से सराहनीय है, किसी भी परिस्थिति में वे अपने कार्य के  प्रति तत्पर रहते हैं, इनके अतिरिक्त  डॉ. नरेंद्र राणा, डॉ. अमित शर्मा का प्रयास भी पर्दे के पीछे बहुत ही सराहनीय है, जो कि राष्ट्रीय समाचारों एवं संशोधन के कार्य को देखते हैं। शिवा शर्मा ने प्रवाचक के रूप में सराहनीय कार्य किया है।  नरेश मलोटिया, डॉ. अभिषेक शर्मा, वत्सदेश राज, डॉ. शिवगर्ग और डॉ. गुलशन शर्मा ने शुरुआत में इस परियोजना की सफलता के लिए मिलकर काम किया। समाचारों का चयन, समाचार पढ़ना, यूट्यूब पर संपादन का काम मिलकर किया गया और फिर धीरे-धीरे पत्रकारों, लेखकों, साहित्यकारों और कवियों के सहयोग से यह काम आगे बढ़ता गया।

हिमाचल प्रदेश से डॉ. नवीन शर्मा, शास्त्री दिलीप, डॉ. श्यामलाल, शिवानी शर्मा, संतोष कुमारी, कुंदन शर्मा, प्रवीण शर्मा, कामेश्वर शर्मा, रूपेंद्र वशिष्ठ और कमल शर्मा। मुंबई से सुधा साठ्ये, प्रतीक साठ्ये, वर्षा टोणगांवकर, हैदराबाद से ईदर धीरज,  असम से  रामायण सहयोगी प्रदीप शर्मा, महाराष्ट्र से अभिजीत तोडकर, गुजरात से जगदीश डाभी, उत्तराखंड से कुलदीप मेंदौला, आचार्य नवीन ममगाई, चेन्नई से माधवन्न, हरियाणा से रजनी, नूतनविष्णु रेग्मी, सचिन शर्मा, उत्तर प्रदेश से अंशुगुप्ता, देवेश उपाध्याय, दिल्ली से ईशान तिवारी, युवराज भट्टराई, बेंगलुरु से रवि खरडिहाल, असम से नारदोपाध्याय, उड़ीसा से डॉ. रूरु कुमार महापात्र, मध्य प्रदेश के उज्जैन से दिनेश चौबे, पश्चिम बंगाल से निशिकान्त पाण्डेय, दूरदर्शन के प्रवक्ता डॉ. परमेश कुमार शर्मा और अन्य पत्रकारों और लेखकों ने निस्वार्थ भाव से सहयोग किया जिससे हिम संस्कृत वार्ता परियोजना धीरे-धीरे देश में प्रसिद्ध हो गई। इसमें विशेष रूप से इस प्रकल्प को सर्वत्र प्रसारित करने में गुजरात से संस्कृत के राष्ट्रीय प्रचारक जगदीश डाभी जी का सहयोग प्रशंसनीय है, जो प्रतिदिन हिमसंस्कृतवार्ताः की टीम के साथ मिलकर निस्वार्थ भाव से सहयोग कर रहे हैं, ऐसे संस्कृतज्ञ हमारे लिए प्रेरणास्रोत हैं। 

10 जुलाई को Himsanskritam.com का शुभारंभ

10 जुलाई, 2022 को हिमसंस्कृतम् समाचार टीम के राजेश ठाकुर के अथक प्रयासों से, दुनिया भर के कई देशों में संस्कृत समाचारों का प्रचार-प्रसार करते हुए, himsanskritam.com का शुभारंभ हुआ। गूगल सर्वेक्षणों के अनुसार, इस समाचार पत्र के पाठक भारत, अमेरिका, आयरलैंड, स्वीडन, नेपाल, चीन, जर्मनी और रूस जैसे देशों में हैं।भारत में पाठकों की संख्या सबसे अधिक है, जबकि अमेरिका में हज़ारों पाठक हैं और यह दूसरे स्थान पर है।

25 अक्टूबर को ई-हिसंस्कृत समाचार पत्र का शुभारंभ

जब देश में संस्कृत विद्वानों की शुभकामनाओं के साथ हिमसंस्कृत समाचार के कार्यों की प्रशंसा हुई, तो संस्कृत मीडिया के क्षेत्र में उपलब्ध संसाधनों के साथ और भी अधिक प्रयास के साथ ई-हिसंस्कृत समाचार पत्र का शुभारंभ किया गया। अब प्रतिदिन लाखों लोग इंटरनेट और सोशल मीडिया पर ई-समाचारपत्र के माध्यम से निःशुल्क समाचार पढ़ते हैं।

22 मई को कार्यालय का उद्घाटन

दो वर्षों के अथक प्रयासों के बाद, हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले के देहरा उप-मंडल के अंतर्गत जसवां तहसील परिसर के सामने, केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के बलाहार परिसर की निदेशक श्रीमती प्रो. मदन मोहन पाठक की उपस्थिति में हिम संस्कृत वार्ता के प्रथम कार्यालय का उद्घाटन किया गया। इस अवसर पर संस्कृत के प्रतिष्ठित विद्वानों ने भाग लिया।

हिमसंस्कृतवार्तायाः कार्यगणः (2024)

1 डॉ.अमनदीप शर्मा( जसवां कांगडा) प्रधान संपादक संस्कृतशिक्षकः,शिक्षाविभागः हिमाचलप्रदेशः

2 डॉ.मनोज शैल(बिलासपुर) कार्यालयीय प्रतिनिधि संस्कृतशिक्षकः,शिक्षाविभागः हिमाचलप्रदेशः

3.डॉ.अमित शर्मा (हमीरपुर संशोधक संस्कृतशिक्षकः,शिक्षाविभागः हिमाचलप्रदेशः

4 डॉ. नरेन्द्र राणा वीडियो एडिटर संस्कृतशिक्षकः,शिक्षाविभागः हिमाचलप्रदेशः

5 शिवकुमार शिवा वीडियो एडिटर/ प्रवाचक संस्कृतशिक्षकः,शिक्षाविभागः हिमाचलप्रदेशः

6 डॉ. शिवकुमार गर्ग पंचाग प्रमुख संस्कृतशिक्षकः,शिक्षाविभागः हिमाचलप्रदेशः

7 राजेश कुमार (जसवां कांगड़ा) सूचना -प्रौद्योगिकी प्रमुखः निजीव्यवस्यायी

8 नरेश मलोटिया रिपोर्टर एवं प्रवाचकः संस्कृतशिक्षकः,शिक्षाविभागः हिमाचलप्रदेशः

9 कामेश्वर शर्मा वार्ता प्रवाचकः संस्कृतशिक्षकः,शिक्षाविभागः हिमाचलप्रदेशः

10 रुपेन्द्र वसिष्ठ वार्ता प्रवाचकः संस्कृतशिक्षकः,शिक्षाविभागः हिमाचलप्रदेशः

हिमसंस्कृतवार्तायाः मुख्यकार्यसमितेः सदस्याः (2024)

1 डॉ.मनोज शैल अध्यक्ष (सेवाव्रती) संस्कृतशिक्षकः,शिक्षाविभागः हिमाचलप्रदेशः

2 डॉ.अमनदीप शर्मा एम.डी (सेवाव्रती) संस्कृतशिक्षकः,शिक्षाविभागः हिमाचलप्रदेशः

3 डॉ.अमित शर्मा सदस्य(सेवाव्रती) संस्कृतशिक्षकः,शिक्षाविभागः हिमाचलप्रदेशः

4 डॉ. नरेन्द्र राणा सदस्य(सेवाव्रती) संस्कृतशिक्षकः,शिक्षाविभागः हिमाचलप्रदेशः

5 शिवकुमार शिवा सदस्य(सेवाव्रती) संस्कृतशिक्षकः,शिक्षाविभागः हिमाचलप्रदेशः

6 डॉ. शिवकुमार गर्ग सदस्य(सेवाव्रती) संस्कृतशिक्षकः,शिक्षाविभागः हिमाचलप्रदेशः

7 अर्चना शर्मा आजीवनसदस्या संस्कृतशिक्षकः,शिक्षाविभागः हिमाचलप्रदेशः

हिमसंस्कृतवार्तायाः संरक्षकमण्डलः (2024)

1 डॉ. बृहस्पति मिश्रः आचार्य के.वि.वि.धर्मशाला

2 डॉ.केशवानंद कौशलः पूर्वसचिव, हिमाचल संस्कृत अकादमी

3 डॉ.नवीन शर्मा सहायकाचार्य, म.वा.सं.वि.वि.कैथल (हरियाणा)

4 आचार्यः श्यामलालः प्राचार्यः, पंजगईं संस्कृतमहाविद्यालयः बिलासपुरम्

5 डॉ.अभिषेकशर्मा ज्योतिर्विदः, पुराणवक्ता संस्कृतविद्वान मण्डी हि.प्र.

हिमसंस्कृतवार्तायाः पत्रकाराः लेखकाश्च (2024)

1 शास्री दिलीपः (संस्कृतशिक्षकः) चम्बा हि.प्र पत्रकारः/लेखकः

2 डा.परमेशकुमार शर्मा दिल्ली पत्रकारः/लेखकः

3 शिवानी शर्मा कांगड़ा (हि.प्र) पत्रकारः

4 सन्तोषकुमारी कांगड़ा (हि.प्र) पत्रकारः

5 कुन्दनशर्मा(संस्कृतशिक्षकः) कांगड़ा (हि.प्र) पत्रकारः

6 प्रवीणशर्मा(संस्कृतशिक्षकः) सिरमौरः पत्रकारः

7 कमलशर्मा कुल्लू पत्रकारः /प्रवाचकः

8 जगदीश डाभी गुजरात पत्रकारः प्रचारकः, चलचित्रवार्ताः

9 सुधा साठ्ये(संस्कृतशिक्षकः) मुम्बई लेखिका

10 नारदोपाध्यायः असम लेखकः

11 अभिजित तोडकरः मुम्बई लेखकः

12 प्रतीक साठ्ये मुम्बई लेखकः सुभाषितानि

13 प्रदीपकुमारनाथः असम रामायणलेखकः

14 महेशशास्त्री राजस्थानम् लेखकः

15 वत्सदेशराजः मण्डी हि.प्र. पत्रकारः

16 कुलदीप मैन्दोला उत्तराखण्डम् पत्रकारः

17 आचार्य नवीनममगांई उत्तराखण्डम् पत्रकारः

18 माधवन्न चेन्नई पत्रकारः

19 रजनी हरियाणा पत्रकारः

20 नूतनविष्णु रेग्मी लखनऊ उ.प्र. पत्रकारः

21 सचिन शर्मा लखनऊ उ.प्र पत्रकारः

22 अंशुगुप्ता लखनऊ उ.प्र पत्रकारः

23 देवेश उपाध्यायः लखनऊ उ.प्र पत्रकारः

24 ईशानतिवारी दिल्ली पत्रकारः

25 रवि खरिडेहाल बैंगलोर पत्रकारः

26 राघवनाथ झा झारखण्ड पत्रकारः

27 डॉ.रुरुकुमार महापात्रा उड़ीसा पत्रकारः

28 युवराजभट्टरई बिहार/ दिल्ली पत्रकारः